श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  6.83.5-6 
गङ्गाया: सुरनद्या वै स्वादु भूत्वा यथोदकम्।
महोदधेर्गुणाभ्यासाल्लवणत्वं निगच्छति॥ ५॥
तथा तत् पौरुषं राजंस्तावकानां परंतप।
प्राप्य पाण्डुसुतान् वीरान् व्यर्थं भवति संयुगे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
परंतप! नरेश! जैसे गंगा नदी का जल स्वादिष्ट होते हुए भी समुद्र में गुण मिल जाने के कारण खारा हो जाता है, उसी प्रकार युद्ध में वीर पाण्डवों के पास पहुँचकर आपके पुत्रों का परिश्रम व्यर्थ हो जाता है। 5-6॥
 
Parantap! Naresh! Just as the water of river Ganga, despite being tasty, becomes salty due to the mixing of its qualities with the ocean, similarly the efforts of your sons go waste after reaching the brave Pandavas in the war. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)