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mahabharat 6.83.48-49h: तत्पश्चात् उसी रथ पर बैठकर उन दोनों वीर योद्धाओं ने अपने प्रबल धनुष खींचकर क्षण भर में युद्धभूमि में मद्रराज के रथ को ढक लिया।   |   mahabharat अध्याय 6.83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  6.83.48-49h 
एकस्थौ तु रणे शूरौ दृढे विक्षिप्य कार्मुकौ॥ ४८॥
मद्रराजरथं तूर्णं छादयामासतु: क्षणात्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसी रथ पर बैठकर उन दोनों वीर योद्धाओं ने अपने प्रबल धनुष खींचकर क्षण भर में युद्धभूमि में मद्रराज के रथ को ढक लिया।
 
Thereafter, sitting on the same chariot, those two valiant warriors drew their strong bows and in a moment covered the chariot of the Madra king on the battlefield. 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)