vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 83: इरावान्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय
»
श्लोक 28
श्लोक
6.83.28
यथा सुरपति: शक्रस्त्रासयामास दानवान्।
तथैव समरे राजा द्रावयामास पाण्डवान्॥ २८॥
अनुवाद
जिस प्रकार भगवान इन्द्र ने राक्षसों को भयभीत कर दिया था, उसी प्रकार भगदत्त ने पाण्डव सैनिकों को भयभीत करके भगाना आरम्भ कर दिया।
Just as Lord Indra had frightened the demons, in the same manner Bhagadatta began to frighten the Pandava soldiers and make them run away. 28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×