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mahabharat 6.83.25: दूसरी ओर, महाबली राक्षसराज घटोत्कच ने सूर्य के समान तेजस्वी तथा ध्वजा से सुसज्जित रथ से भगदत्त पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.83.25 
हैडिम्बो राक्षसेन्द्रस्तु भगदत्तं समाद्रवत्।
रथेनादित्यवर्णेन सध्वजेन महाबल:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, महाबली राक्षसराज घटोत्कच ने सूर्य के समान तेजस्वी तथा ध्वजा से सुसज्जित रथ से भगदत्त पर आक्रमण किया।
 
On the other hand, the mighty demon king Ghatotkacha attacked Bhagadatta with a chariot as bright as the sun and fitted with a flag.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)