श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.83.17 
भल्लाभ्यां च सुतीक्ष्णाभ्यां धनु: केतुं च मारिष।
चिच्छेद समरे राजंस्तदद्भुतमिवाभवत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
आर्य! हे राजन्! तत्पश्चात् उसने युद्धभूमि में दो तीक्ष्ण भालों से उसका धनुष और ध्वज काट डाला। यह अद्भुत घटना थी।
 
Arya! O King! Thereafter he cut off his bow and flag on the battlefield with two sharp spears. That was an amazing thing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)