श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.83.15 
युध्यतां हि तथा राजन् विशेषो न व्यदृश्यत।
यततां शत्रुनाशाय कृतप्रतिकृतैषिणाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! दोनों पक्ष अपने शत्रुओं का नाश करने के लिए प्रयत्नशील थे। दोनों एक-दूसरे के अस्त्रों का प्रतिकार करना चाहते थे। इसलिए युद्ध करते समय उनमें कोई भेद नहीं दिखाई देता था॥15॥
 
O lord of men! Both the sides were trying to destroy their enemy. Both wanted to counter each other's weapons. Therefore, there was no difference visible between them while fighting.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)