श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 83: इरावान‍्के द्वारा विन्द और अनुविन्दकी पराजय, भगदत्तसे घटोत्कचका हारना तथा मद्रराजपर नकुल और सहदेवकी विजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.83.1 
धृतराष्ट्र उवाच
बहूनि हि विचित्राणि द्वैरथानि स्म संजय।
पाण्डूनां मामकै: सार्धमश्रौषं तव जल्पत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले: संजय! मैंने तुमसे पाण्डवों और मेरे पुत्रों के बीच हुए अनेक अद्भुत द्वन्द्वयुद्धों का वर्णन सुना है।
 
Dhritarashtra said: Sanjaya! I have heard from you the description of the many wonderful duels that the Pandavas have fought with my sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)