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mahabharat 6.82.61: महाराज! जब घोड़े मर गये, तब कृतवर्मा तुरन्त ही आपके पुत्र के सामने आपके साले वृषभ के रथ पर चढ़ गया।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.82.61 
हताश्वश्च ततस्तूर्णं वृषकस्य रथं ययौ।
श्यालस्य ते महाराज तव पुत्रस्य पश्यत:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब घोड़े मर गये, तब कृतवर्मा तुरन्त ही आपके पुत्र के सामने आपके साले वृषभ के रथ पर चढ़ गया।
 
Maharaj! Then, when the horses were killed, Kritavarma immediately mounted the chariot of your brother-in-law Vrishakha in front of your son. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)