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mahabharat 6.82.57: तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भीमसेन ने युद्ध में अत्यन्त क्रोधपूर्वक अट्टहास करते हुए कृतवर्मा पर अनेक बाणों से आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.82.57 
तत: प्रहस्य समरे भीमसेन: परंतप:।
प्रेषयामास संक्रुद्ध: सायकान् कृतवर्मणे॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भीमसेन ने युद्ध में अत्यन्त क्रोधपूर्वक अट्टहास करते हुए कृतवर्मा पर अनेक बाणों से आक्रमण किया।
 
Then Bhimasena, that tormentor of enemies, laughing in the battle, with great anger attacked Kritavarma with many arrows. 57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)