Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.82.49-51h: भरतनंदन! राजेन्द्र! जनेश्वर! धृष्टद्युम्न के बाणों से आच्छादित होने पर भी आपके पुत्र दुर्योधन के हृदय में कोई पीड़ा नहीं हुई। उसने युद्धस्थल में ही तत्काल नब्बे बाणों से धृष्टद्युम्न को घायल कर दिया। यह अद्भुत बात थी। | mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स च्छाद्यमानो विशिखैर्धृष्टद्युम्नेन भारत॥ ४९॥
विव्यथे न च राजेन्द्र तव पुत्रो जनेश्वर।
धृष्टद्युम्नं च समरे तूर्णं विव्याध पत्रिभि:॥ ५०॥
षष्टॺा च त्रिंशता चैव तदद्भुतमिवाभवत्।
अनुवाद
भरतनंदन! राजेन्द्र! जनेश्वर! धृष्टद्युम्न के बाणों से आच्छादित होने पर भी आपके पुत्र दुर्योधन के हृदय में कोई पीड़ा नहीं हुई। उसने युद्धस्थल में ही तत्काल नब्बे बाणों से धृष्टद्युम्न को घायल कर दिया। यह अद्भुत बात थी।
Bharatanandan! Rajendra! Janeshwar! Even after being covered with the arrows of Dhrishtadyumna, your son Duryodhan did not feel any pain in his heart. He immediately injured Dhrishtadyumna with ninety arrows on the battlefield. That was a wonderful thing. 49-50 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥