श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.82.45 
तत् तथा पीडितं तेन माधवेन यशस्विना।
प्रदुद्राव भयाद् रक्षस्त्यक्त्वा सात्यकिमाहवे॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
मधुवंशी महाप्रतापी सात्यकि द्वारा इस प्रकार पीड़ित होकर वह राक्षस उसे युद्धभूमि में छोड़कर भयभीत होकर भाग गया ॥ 45॥
 
Being tormented in this manner by the extremely famous Satyaki of the Madhuvanshi clan, the Rakshasa abandoned him on the battlefield and fled in fear. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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