vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध
»
श्लोक 41
श्लोक
6.82.41
मायां च राक्षसीं कृत्वा शरवर्षैरवाकिरत्।
तत्राद्भुतमपश्याम शैनेयस्य पराक्रमम्॥ ४१॥
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने राक्षसी माया फैलाकर उन पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी। उस समय हमने सात्यकि का अद्भुत पराक्रम देखा ॥41॥
After that, he spread demonic illusion and started raining arrows on them. At that time we saw the amazing bravery of Satyaki. 41॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd