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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.82.40 
राक्षसेन्द्रस्ततस्तस्य धनुश्चिच्छेद भारत।
अर्धचन्द्रेण समरे तं च विव्याध सायकै:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तब युद्धभूमि में राक्षसराज अलम्बुष ने अर्धचन्द्राकार बाण से सात्यकि का धनुष काट डाला तथा उसके अनेक धनुर्धरों पर आक्रमण कर उन्हें भी घायल कर दिया।
 
Then on the battlefield, the demon king Alambusha cut Satyaki's bow with a crescent-shaped arrow and attacked many of his archers, wounding them too.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)