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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.82.34 
ततोऽस्य विमलं द्रौणि: शतचन्द्रं मनोरमम्।
चर्माच्छिनदसिं चास्य खण्डयामास संयुगे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तब अश्वत्थामा ने युद्धभूमि में शिखंडी की अत्यंत सुंदर ढाल और चमकती हुई तलवार को, जो सौ अर्धचंद्राकार चिह्नों से सुसज्जित थी, टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Then Ashvatthama broke into pieces on the battlefield Shikhandi's most beautiful shield and shining sword, decorated with a hundred crescent-shaped symbols.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)