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mahabharat 6.82.31: महाराज! जब शिखंडी हाथ में तलवार लिए युद्धभूमि में घूम रहा था, तब अश्वत्थामा को उसके शरीर में एक छोटा सा छेद भी दिखाई नहीं दिया। यह अद्भुत बात थी।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.82.31 
सखड्गस्य महाराज चरतस्तस्य संयुगे।
नान्तरं ददृशे द्रौणिस्तदद्भुतमिवाभवत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जब शिखंडी हाथ में तलवार लिए युद्धभूमि में घूम रहा था, तब अश्वत्थामा को उसके शरीर में एक छोटा सा छेद भी दिखाई नहीं दिया। यह अद्भुत बात थी।
 
Maharaj! While Shikhandi was roaming in the battle field with his sword in hand, Ashwatthama did not see even a small hole in his body. That was an amazing thing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)