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mahabharat 6.82.28-29h: राजन! तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए अश्वत्थामा ने युद्धस्थल में शिखण्डी के ध्वज, सारथि, घोड़ों और अस्त्र-शस्त्रों को अनेक बाणों से आधे समय में ही काट डाला। 28 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  6.82.28-29h 
अश्वत्थामा तत: क्रुद्धो निमेषार्धाच्छिखण्डिन:।
ध्वजं सूतमथो राजंस्तुरगानायुधानि च॥ २८॥
शरैर्बहुभिराच्छिद्य पातयामास संयुगे।
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए अश्वत्थामा ने युद्धस्थल में शिखण्डी के ध्वज, सारथि, घोड़ों और अस्त्र-शस्त्रों को अनेक बाणों से आधे समय में ही काट डाला। 28 1/2॥
 
Rajan! Thereafter, Ashwatthama, filled with anger, cut down Shikhandi's flag, charioteer, horses and weapons in the battlefield with many arrows in half the time. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)