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mahabharat 6.82.27: उन तीन बाणों को माथे में लगाकर रथियों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा तीन ऊँचे सुवर्णमय शिखरों वाले मेरु पर्वत के समान शोभायमान होने लगा॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.82.27 
स बभौ रथशार्दूलो ललाटे संस्थितैस्त्रिभि:।
शिखरै: काञ्चनमयैर्मेरुस्त्रिभिरिवोच्छ्रितै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उन तीन बाणों को माथे में लगाकर रथियों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा तीन ऊँचे सुवर्णमय शिखरों वाले मेरु पर्वत के समान शोभायमान होने लगा॥ 27॥
 
With those three arrows stuck in his forehead, Ashwatthama, that best of charioteers, began to look like Mount Meru with its three tall golden peaks.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)