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mahabharat 6.82.24: अपने पुत्र को मारा गया देखकर विराट भयभीत होकर भाग गया और मृत्यु के समान भयंकर द्रोणाचार्य को युद्धभूमि में मुँह के बल गिरा हुआ छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  6.82.24 
हतं तमात्मजं दृष्ट्वा विराट: प्राद्रवद् भयात्।
उत्सृज्य समरे द्रोणं व्यात्ताननमिवान्तकम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अपने पुत्र को मारा गया देखकर विराट भयभीत होकर भाग गया और मृत्यु के समान भयंकर द्रोणाचार्य को युद्धभूमि में मुँह के बल गिरा हुआ छोड़ दिया।
 
Seeing his son killed, Virata fled in fear, leaving Dronacharya, who was as fearsome as death, on the battlefield with his face down. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)