श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.82.23 
स पपात रणे तूर्णं भारद्वाजशराहत:।
धनुस्त्यक्त्वा शरांश्चैव पितुरेव समीपत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के बाणों से घायल होकर शंख ने अपना धनुष-बाण अपने पिता के पास छोड़ दिया और तुरंत युद्धभूमि में गिर पड़ा।
 
After being wounded by Dronacharya's arrows, Sankha left his bow and arrow near his father and immediately fell on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)