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mahabharat 6.82.22: वह बाण शंख की छाती को चीरता हुआ उसका रक्त पी गया और ज़मीन में धँस गया। उसके सबसे अच्छे पंख रक्त से भीगकर लाल हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.82.22 
स तस्य हृदयं भित्त्वा पीत्वा शोणितमाहवे।
जगाम धरणीं बाणो लोहितार्द्रवरच्छद:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह बाण शंख की छाती को चीरता हुआ उसका रक्त पी गया और ज़मीन में धँस गया। उसके सबसे अच्छे पंख रक्त से भीगकर लाल हो रहे थे।
 
That arrow pierced Shankha's chest, drank his blood and sank into the ground. His best feathers were getting soaked in blood and were turning red.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)