श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.82.21 
भारद्वाजस्तत: क्रुद्ध: शरमाशीविषोपमम्।
चिक्षेप समरे तूर्णं शङ्खं प्रति जनेश्वर॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे कुलदेव! तब द्रोणाचार्य ने अत्यन्त क्रोधित होकर युद्धस्थल में शंख पर शीघ्रतापूर्वक विषैले सर्प के समान भयंकर बाण चलाया।
 
O lord of the family! Then Dronacharya became very angry and quickly shot a fierce arrow, like a poisonous snake, at Shankha on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)