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mahabharat 6.82.19: जब सारथि और घोड़े मारे गए, तो रथियों में श्रेष्ठ विराट तुरन्त अपने रथ से कूद पड़े और अपने पुत्र के रथ पर चढ़ गए।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.82.19 
स हताश्वादवप्लुत्य स्यन्दनाद्धतसारथि:।
आरुरोह रथं तूर्णं पुत्रस्य रथिनां वर:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब सारथि और घोड़े मारे गए, तो रथियों में श्रेष्ठ विराट तुरन्त अपने रथ से कूद पड़े और अपने पुत्र के रथ पर चढ़ गए।
 
When the charioteer and the horses were killed, Virata, the best of charioteers, immediately jumped from his chariot and mounted his son's chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)