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mahabharat 6.82.17: फिर उसने एक बाण से ध्वजा को, पाँच बाणों से सारथि को और एक बाण से धनुष को छेद दिया। इससे महाबली ब्राह्मण द्रोणाचार्य क्रोधित हो गए।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.82.17 
ध्वजमेकेन विव्याध सारथिं चास्य पञ्चभि:।
धनुरेकेषुणाविध्यत् तत्राक्रुध्यद् द्विजर्षभ:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
फिर उसने एक बाण से ध्वजा को, पाँच बाणों से सारथि को और एक बाण से धनुष को छेद दिया। इससे महाबली ब्राह्मण द्रोणाचार्य क्रोधित हो गए।
 
Then he pierced the flag with one arrow, the charioteer with five arrows and the bow with one arrow. This enraged the great Brahmin Dronacharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)