श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.82.16 
शरांश्चाशीविषाकाराञ्‍ज्‍वलितान् पन्नगानिव।
द्रोणं त्रिभिश्च विव्याध चतुर्भिश्चास्य वाजिन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उसने उसमें से प्रज्वलित विषैले सर्पों के समान आकार के बाण छोड़े और उनमें से तीन बाणों से द्रोणाचार्य को तथा चार बाणों से उनके घोड़ों को घायल कर दिया।
 
He released arrows shaped like poisonous serpents blazing from it and pierced Dronacharya with three of them and his horses with four arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)