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mahabharat 6.82.15: सेनापति विराट ने टूटे हुए धनुष को फेंककर शीघ्रतापूर्वक दूसरा शक्तिशाली धनुष उठाया जो भार सहन करने में समर्थ था॥15॥   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.82.15 
तदपास्य धनुश्छिन्नं विराटो वाहिनीपति:।
अन्यदादत्त वेगेन धनुर्भारसहं दृढम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सेनापति विराट ने टूटे हुए धनुष को फेंककर शीघ्रतापूर्वक दूसरा शक्तिशाली धनुष उठाया जो भार सहन करने में समर्थ था॥15॥
 
Throwing away the broken bow, Commander Virata swiftly took up another strong bow which was capable of bearing the weight.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)