Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.82.14: उधर द्रोणाचार्य ने युद्ध में मत्स्यराज विराट को एक ही बाण से बींध डाला तथा दूसरे बाण से उसकी ध्वजा और धनुष काट डाले।   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.82.14 
भारद्वाजस्तु समरे मत्स्यं विव्याध पत्रिणा।
ध्वजं चास्य शरेणाजौ धनुश्चैकेन चिच्छिदे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उधर द्रोणाचार्य ने युद्ध में मत्स्यराज विराट को एक ही बाण से बींध डाला तथा दूसरे बाण से उसकी ध्वजा और धनुष काट डाले।
 
On the other hand, Dronacharya pierced Matsyaraj Virat with a single arrow in the battle and cut off his flag and bow with another arrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)