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mahabharat 6.82.11: जब श्रीकृष्ण अपने हाथों में बागडोर थामे हुए और दूसरे मध्याह्न सूर्य के समान चमकते हुए युद्धभूमि में प्रकट हुए, तब कोई भी योद्धा उनकी ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकता था ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 6.82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 82: श्रीकृष्ण और अर्जुनसे डरकर कौरवसेनामें भगदड़, द्रोणाचार्य और विराटका युद्ध, विराटपुत्र शंखका वध, शिखण्डी और अश्वत्थामाका युद्ध, सात्यकिके द्वारा अलम्बुषकी पराजय, धृष्टद्युम्नके द्वारा दुर्योधनकी हार तथा भीमसेन और कृतवर्माका युद्ध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.82.11 
अभीषुहस्तं कृष्णं च दृष्ट्वाऽऽदित्यमिवापरम्।
मध्यन्दिनगतं संख्ये न शेकु: प्रतिवीक्षितुम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीकृष्ण अपने हाथों में बागडोर थामे हुए और दूसरे मध्याह्न सूर्य के समान चमकते हुए युद्धभूमि में प्रकट हुए, तब कोई भी योद्धा उनकी ओर आँख उठाकर भी नहीं देख सकता था ॥11॥
 
When Krishna, holding the reins in His Hands and shining like the second midday Sun, appeared on the battlefield, no warrior could even look at Him with his eyes. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)