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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 81: सातवें दिनके युद्धमें कौरव-पाण्डव-सेनाओंका मण्डल और वज्रव्यूह बनाकर भीषण संघर्ष  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.81.8 
अवश्यं हि मया राजंस्तव वाच्यं हितं सदा।
अशक्या: पाण्डवा जेतुं देवैरपि सवासवै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मुझे सदैव आपके हित में ही बातें कहनी चाहिए; इसीलिए मैं यह कह रहा हूँ - इन्द्र आदि सभी देवता भी पाण्डवों को नहीं हरा सकते।
 
O King! I must always speak things that are in your best interest; that is why I am saying this - even Indra and all the other gods cannot defeat the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)