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mahabharat 6.81.33-34h: तत्पश्चात् उन राजसी समूहों ने कुन्तीपुत्र धनंजय को चारों ओर से घेर लिया। उनके हाथों में शक्ति, तोमर, नाराच, गदा और परिघ आदि अस्त्र-शस्त्र शोभायमान थे।   |   mahabharat अध्याय 6.81: सातवें दिनके युद्धमें कौरव-पाण्डव-सेनाओंका मण्डल और वज्रव्यूह बनाकर भीषण संघर्ष   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 81: सातवें दिनके युद्धमें कौरव-पाण्डव-सेनाओंका मण्डल और वज्रव्यूह बनाकर भीषण संघर्ष  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.81.33-34h 
ततो राजसमूहास्ते परिवव्रुर्धनंजयम्॥ ३३॥
शक्तितोमरनाराचगदापरिघपाणय:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन राजसी समूहों ने कुन्तीपुत्र धनंजय को चारों ओर से घेर लिया। उनके हाथों में शक्ति, तोमर, नाराच, गदा और परिघ आदि अस्त्र-शस्त्र शोभायमान थे।
 
Thereafter, those royal groups surrounded Kunti's son Dhananjay from all sides. Weapons like Shakti, Tomar, Narach, Mace and Parigh etc. were adorning their hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)