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mahabharat 6.80.17: राजा ! जैसे आकाश में बादलों के साथ बिजली चमक रही हो, वैसे ही उस युद्धभूमि में नाना प्रकार के दाँतों वाले हाथियों के समूह चारों ओर खड़े होकर शोभायमान हो रहे थे। वे सुन्दर रीति से चलाए जा रहे थे॥17॥   |   mahabharat अध्याय 6.80: भीष्मद्वारा दुर्योधनको आश्वासन तथा सातवें दिनके युद्धके लिये कौरव-सेनाका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 80: भीष्मद्वारा दुर्योधनको आश्वासन तथा सातवें दिनके युद्धके लिये कौरव-सेनाका प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.80.17 
नानारङ्गा: समरे तत्र राजन्
मेघैर्युता विद्युत: खे यथैव।
वृन्दै: स्थिताश्चापि सुसम्प्रयुक्ता-
श्चकाशिरे दन्तिगणा: समन्तात्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा ! जैसे आकाश में बादलों के साथ बिजली चमक रही हो, वैसे ही उस युद्धभूमि में नाना प्रकार के दाँतों वाले हाथियों के समूह चारों ओर खड़े होकर शोभायमान हो रहे थे। वे सुन्दर रीति से चलाए जा रहे थे॥17॥
 
King! Just as lightning is flashing in the sky along with the clouds, similarly, in that battleground, herds of elephants with tusks of many colours were standing all around and looking beautiful. They were being led in a beautiful manner.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)