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mahabharat 6.80.11: महानुभाव! आपके कार्य की सफलता के लिए युद्ध में अपने प्राणों की रक्षा करना मुझे बहुत आवश्यक नहीं लगता। आपकी मनोकामना की सिद्धि के लिए मैं देवताओं सहित समस्त भयंकर दानवों को भस्म कर सकता हूँ; फिर शत्रुओं की सेना का क्या होगा?   |   mahabharat अध्याय 6.80: भीष्मद्वारा दुर्योधनको आश्वासन तथा सातवें दिनके युद्धके लिये कौरव-सेनाका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.80.11 
रणे तवार्थाय महानुभाव
न जीवितं रक्ष्यतमं ममाद्य।
सर्वांस्तवार्थाय सदेवदैत्यान्
घोरान् दहेयं किमु शत्रुसेनाम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महानुभाव! आपके कार्य की सफलता के लिए युद्ध में अपने प्राणों की रक्षा करना मुझे बहुत आवश्यक नहीं लगता। आपकी मनोकामना की सिद्धि के लिए मैं देवताओं सहित समस्त भयंकर दानवों को भस्म कर सकता हूँ; फिर शत्रुओं की सेना का क्या होगा?
 
Mahanubhaav! For the success of your work, I do not feel that it is very important for me to save my life in the war. For the success of your desire, I can burn all the fierce demons along with the gods; then what about the army of enemies?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)