श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 8: रमणक, हिरण्यक, शृंगवान् पर्वत तथा ऐरावतवर्षका वर्णन  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  6.8.8-9 
शृङ्गाणि च विचित्राणि त्रीण्येव मनुजाधिप॥ ८॥
एकं मणिमयं तत्र तथैकं रौक्ममद्भुतम्।
सर्वरत्नमयं चैकं भवनैरुपशोभितम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मनुजेश्वर! श्रृंगवान पर्वत के केवल तीन विचित्र शिखर हैं। उनमें से एक तो बहुमूल्य रत्नों से निर्मित है, दूसरा अद्भुत सुवर्ण से निर्मित है और तीसरा अनेक भवनों से युक्त तथा सर्वरों से सुशोभित है। 8-9॥
 
Manujeshwar! There are only three strange peaks of Shringavan mountain. One of them is made of precious stones, the second one is made of amazing gold and the third one is adorned with many buildings and is adorned with servers. 8-9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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