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mahabharat 6.8.19: वैशम्पायनजी कहते हैं: महाराज जनमेजय! संजय की यह बात सुनकर महाबुद्धिमान धृतराष्ट्र को अपने पुत्रों की चिंता होने लगी।   |   mahabharat अध्याय 6.8: रमणक, हिरण्यक, शृंगवान् पर्वत तथा ऐरावतवर्षका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.8.19 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: संजयेन धृतराष्ट्रो महामना:।
ध्यानमन्वगमद् राजन् पुत्रान् प्रति जनाधिप॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: महाराज जनमेजय! संजय की यह बात सुनकर महाबुद्धिमान धृतराष्ट्र को अपने पुत्रों की चिंता होने लगी।
 
Vaishmpayana says: Maharaja Janamejaya! On hearing Sanjaya say this, the great-minded Dhritarashtra began to worry for his sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)