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mahabharat 6.8.18: हे राजन! पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश सब वही हैं। वे समस्त जीवों के लिए यज्ञस्वरूप हैं। अग्नि उनका मुख है।   |   mahabharat अध्याय 6.8: रमणक, हिरण्यक, शृंगवान् पर्वत तथा ऐरावतवर्षका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.8.18 
पृथिव्यापस्तथाऽऽकाशं वायुस्तेजश्च पार्थिव।
स यज्ञ: सर्वभूतानामास्यं तस्य हुताशन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश सब वही हैं। वे समस्त जीवों के लिए यज्ञस्वरूप हैं। अग्नि उनका मुख है।
 
O King! Earth, water, fire, air and sky are all He. He is the form of sacrifice for all living beings. Fire is His face.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)