Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.8.15-16: भगवान विष्णु क्षीरसागर के उत्तर तट पर निवास करते हैं, वहाँ वे स्वर्णमय रथ पर विराजमान हैं। उस रथ में आठ पहिए हैं। उसकी गति मनके के समान है। वे सम्पूर्ण भूतों से युक्त, अग्नि के समान तेजस्वी, अत्यन्त तेजस्वी और जम्बुनद नामक स्वर्ण से विभूषित हैं। 15-16॥   |   mahabharat अध्याय 6.8: रमणक, हिरण्यक, शृंगवान् पर्वत तथा ऐरावतवर्षका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 8: रमणक, हिरण्यक, शृंगवान् पर्वत तथा ऐरावतवर्षका वर्णन  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  6.8.15-16 
क्षीरोदस्य समुद्रस्य तथैवोत्तरत: प्रभु:।
हरिर्वसति वैकुण्ठ: शकटे कनकामये॥ १५॥
अष्टचक्रं हि तद् यानं भूतयुक्तं मनोजवम्।
अग्निवर्णं महातेजो जाम्बूनदविभूषितम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु क्षीरसागर के उत्तर तट पर निवास करते हैं, वहाँ वे स्वर्णमय रथ पर विराजमान हैं। उस रथ में आठ पहिए हैं। उसकी गति मनके के समान है। वे सम्पूर्ण भूतों से युक्त, अग्नि के समान तेजस्वी, अत्यन्त तेजस्वी और जम्बुनद नामक स्वर्ण से विभूषित हैं। 15-16॥
 
Lord Vishnu resides on the north bank of Kshirsagar, he sits there on a golden chariot. There are eight wheels in that chariot. Its speed is like that of a bead. He is possessed by all the ghosts, radiant like fire, extremely brilliant and adorned with gold called Jambunad. 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)