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mahabharat 6.79.55-56: नरेश्वर! दुर्मुख, दुर्जय, वीर दुर्मर्षण, शत्रुंजय और शत्रुसह - ये सब प्रसिद्ध वीर क्रोध में भरकर एक साथ पाँचों भाइयों का सामना करने के लिए आगे बढ़े ॥55-56॥   |   mahabharat अध्याय 6.79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  6.79.55-56 
दुर्मुखो दुर्जयश्चैव तथा दुर्मर्षणो युवा॥ ५५॥
शत्रुञ्जय: शत्रुसह: सर्वे क्रुद्धा यशस्विन:।
प्रत्युद्याता महाराज केकयान् भ्रातर: समम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! दुर्मुख, दुर्जय, वीर दुर्मर्षण, शत्रुंजय और शत्रुसह - ये सब प्रसिद्ध वीर क्रोध में भरकर एक साथ पाँचों भाइयों का सामना करने के लिए आगे बढ़े ॥55-56॥
 
Nareshwar! Durmukh, Durjay, the young brave Durmarshan, Shatrunjay and Shatrusah – all these famous heroes, filled with anger, moved forward together to face the five brothers. 55-56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)