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mahabharat 6.79.51-52h: तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए शतानीक ने शीघ्र ही लक्ष्य को मार डालने वाले भल्ल नामक दूसरे बाण का प्रयोग करके दुष्कर्ण के हृदय में गहरी चोट मारी, जिससे दुष्कर्ण वज्रवृक्ष के समान पृथ्वी पर गिर पड़ा॥51 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  6.79.51-52h 
अथापरेण भल्लेन सुयुक्तेनाशुपातिना।
दुष्कर्णं सुदृढं क्रुद्धो विव्याध हृदये भृशम्॥ ५१॥
स पपात ततो भूमौ वज्राहत इव द्रुम:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् क्रोध में भरे हुए शतानीक ने शीघ्र ही लक्ष्य को मार डालने वाले भल्ल नामक दूसरे बाण का प्रयोग करके दुष्कर्ण के हृदय में गहरी चोट मारी, जिससे दुष्कर्ण वज्रवृक्ष के समान पृथ्वी पर गिर पड़ा॥51 1/2॥
 
After that, using another arrow named Bhalla, which kills the target quickly, in an excellent manner, Satanika, filled with anger, struck a deep blow in the heart of Dushkarna. Due to this, Dushkarna fell on the earth like a thunderbolt tree. 51 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)