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mahabharat 6.79.50: दुष्कर्ण के घोड़े मन और वायु के समान वेगवान थे। उनका रंग चित्तीदार था। शतानीक ने बारह तीखे बाणों से उन सभी घोड़ों को तुरन्त मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 6.79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.79.50 
अश्वान् मनोजवांस्तस्य कर्बुरान् वातरंहस:।
जघान निशितैस्तूर्णं सर्वान् द्वादशभि: शरै:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
दुष्कर्ण के घोड़े मन और वायु के समान वेगवान थे। उनका रंग चित्तीदार था। शतानीक ने बारह तीखे बाणों से उन सभी घोड़ों को तुरन्त मार डाला।
 
Dushkarna's horses were as fast as the mind and the wind. Their colour was spotted. Satanika killed all those horses instantly with twelve sharp arrows. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)