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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.79.5 
यत् पुरा मत्सरी भूत्वा पाण्डवानवमन्यसे।
तस्य पापस्य गान्धारे पश्य व्यसनमागतम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
गांधारीपुत्र! पूर्वकाल में तुम हम पांडवों से ईर्ष्या करते रहे हो और हमारा अपमान किया है। उसी पाप के फलस्वरूप यह विपत्ति तुम पर आई है। अपनी आँखें खोलो और देखो।
 
Son of Gandhari! In the past you have been jealous of us Pandavas and have insulted us. This calamity has fallen on you as a result of that sin. Open your eyes and see.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)