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श्लोक 6.79.47  |
अथान्यद् धनुरादाय भारसाहमनुत्तमम्।
समादत्त शरान् घोरान् शतानीको महाबल:॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| तब महाबली शतानीक ने भार वहन करने में समर्थ दूसरा उत्तम धनुष लिया और उससे भयंकर बाण चलाए ॥47॥ |
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| Then the mighty Satanika took another excellent bow capable of bearing the load and shot terrible arrows with it. ॥ 47॥ |
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