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श्लोक 6.79.46  |
तथा तस्मिन् वर्तमाने दुष्कर्णो भ्रातुरन्तिके।
चिच्छेद समरे चापं नाकुले: क्रोधमूर्च्छित:॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसा करते ही अपने भाई के पास खड़ा दुष्कर्ण क्रोधित हो उठा और उसने युद्ध भूमि में नकुल के पुत्र शतानीक का धनुष काट डाला। |
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| When he did this, Dushkarna who was standing near his brother became furious. He cut off the bow of Nakul's son Satanika in the battlefield. |
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