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mahabharat 6.79.45: तत्पश्चात् शतानीक ने समस्त आवरणों को भेदने में समर्थ एक अन्य तीक्ष्ण बाण द्वारा जयत्सेन की छाती पर गहरा घाव कर दिया ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 6.79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.79.45 
अथान्येन सुतीक्ष्णेन सर्वावरणभेदिना।
शतानीको जयत्सेनं विव्याध हृदये भृशम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शतानीक ने समस्त आवरणों को भेदने में समर्थ एक अन्य तीक्ष्ण बाण द्वारा जयत्सेन की छाती पर गहरा घाव कर दिया ॥45॥
 
Thereafter, with another sharp arrow capable of piercing all coverings, Shatanika deeply wounded Jayatsen's chest. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)