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mahabharat 6.79.37: महारथी श्रुतकर्मा अपने घोड़ों के मारे जाने पर भी रथ पर खड़े रहे और उन्होंने अत्यन्त क्रोध में आकर दुर्मुख पर प्रज्वलित उल्का के समान एक भाला चलाया।   |   mahabharat अध्याय 6.79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 79: भीमसेनके द्वारा दुर्योधनकी पराजय, अभिमन्यु और द्रौपदीपुत्रोंका धृतराष्ट्रपुत्रोंके साथ युद्ध तथा छठे दिनके युद्धकी समाप्ति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.79.37 
स हताश्वे रथे तिष्ठन् श्रुतकर्मा महारथ:।
शक्तिं चिक्षेप संक्रुद्धो महोल्कां ज्वलितामिव॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महारथी श्रुतकर्मा अपने घोड़ों के मारे जाने पर भी रथ पर खड़े रहे और उन्होंने अत्यन्त क्रोध में आकर दुर्मुख पर प्रज्वलित उल्का के समान एक भाला चलाया।
 
The great car-warrior Shrutakarma remained standing on the chariot even after his horses were killed and in great anger he hurled a spear at Durmukh, which was like a blazing meteor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)