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mahabharat 6.78.8-9: युद्धस्थल में क्रोध में भरे हुए इन दोनों वीरों को एक-दूसरे पर आक्रमण करते देख, दुर्योधन के सभी वीर योद्धाओं ने अपने छोटे भाई भीमसेन को, जो घोर पाप करने वाला था, जीवित पकड़ लेने के सम्बन्ध में दी गई पहली सलाह को याद करके, दृढ़ निश्चय करके उन्हें पकड़ने का प्रयत्न करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.78: उभय पक्षकी सेनाओंका संकुल युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 78: उभय पक्षकी सेनाओंका संकुल युद्ध  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  6.78.8-9 
तौ दृष्ट्वा समरे क्रुद्धौ विनिघ्नन्तौ परस्परम्।
दुर्योधनानुजा: सर्वे शूरा: संत्यक्तजीविता:॥ ८॥
संस्मृत्य मन्त्रितं पूर्वं निग्रहे भीमकर्मण:।
निश्चयं परमं कृत्वा निग्रहीतुं प्रचक्रमु:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में क्रोध में भरे हुए इन दोनों वीरों को एक-दूसरे पर आक्रमण करते देख, दुर्योधन के सभी वीर योद्धाओं ने अपने छोटे भाई भीमसेन को, जो घोर पाप करने वाला था, जीवित पकड़ लेने के सम्बन्ध में दी गई पहली सलाह को याद करके, दृढ़ निश्चय करके उन्हें पकड़ने का प्रयत्न करने लगे।
 
Seeing these two heroes, filled with rage, attacking each other on the battlefield, all the valiant warriors of Duryodhana, remembering the first advice given to them about capturing alive their younger brother Bhimasena, who had committed a terrible deed, came to a firm resolution and began making efforts to capture them. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)