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mahabharat 6.77.d5h-64: भरत! धनुर्विद्या में निपुण तथा सम्पूर्ण विषयों में पारंगत अपने गुरु द्रोणाचार्य को अचानक वहाँ आते देख पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने आपके पुत्रों को मारने की इच्छा त्याग दी।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक d5h-64
 
 
श्लोक  6.77.d5h-64 
(द्रोणमिष्वस्त्रकुशलं सर्वविद्यासु पारगम्।)
दृष्ट्वा तु सहसाऽऽयान्तं पाञ्चाल्यो गुरुमात्मन:।
नाशंसत वधं वीर: पुत्राणां तव भारत॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
भरत! धनुर्विद्या में निपुण तथा सम्पूर्ण विषयों में पारंगत अपने गुरु द्रोणाचार्य को अचानक वहाँ आते देख पांचाल राजकुमार धृष्टद्युम्न ने आपके पुत्रों को मारने की इच्छा त्याग दी।
 
Bhaarata! The Panchala prince Dhrishtadyumna, on seeing his Guru Dronacharya, who was skilled in archery and well versed in all the subjects, suddenly arriving there, gave up his desire to kill your sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)