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mahabharat 6.77.d1: भीमसेन की गदा के प्रहार से विशाल गजराजों के मटकों के ढेर फट गये, उनकी पीठ फट गयी और उनके शरीर के एक-एक अंग छिन्न-भिन्न हो गये और उसी अवस्था में वे अपने सवारों सहित इस प्रकार गिर पड़े, मानो पर्वत टूटकर गिर पड़े हों।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  6.77.d1 
(गदया भीमसेनेन ताडिता वारणोत्तमा:।
भिन्नकुम्भा महाकाया भिन्नपृष्ठास्तथैव च॥
भिन्नगात्रा: सहारोहा: शेरते पर्वता इव।
 
 
अनुवाद
भीमसेन की गदा के प्रहार से विशाल गजराजों के मटकों के ढेर फट गये, उनकी पीठ फट गयी और उनके शरीर के एक-एक अंग छिन्न-भिन्न हो गये और उसी अवस्था में वे अपने सवारों सहित इस प्रकार गिर पड़े, मानो पर्वत टूटकर गिर पड़े हों।
 
Due to the blow of Bhimsen's mace, the pots of huge Gajrajas' pots burst, their backs were split and each of their body parts was disintegrated and in that very state they collapsed along with their riders, as if the mountains had collapsed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)