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mahabharat 6.77.75: द्रोणाचार्य को क्रोधित होकर शत्रु सेना पर आक्रमण करते तथा पाण्डव सेना को भागते देखकर आपके सैनिक अत्यन्त प्रसन्न हुए। हे भारत! आपके सभी योद्धा चारों ओर से द्रोणाचार्य की स्तुति करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  6.77.75 
तथा दृष्ट्वा च तत्सैन्यं जहृषे तावकं बलम्।
दृष्ट्वाऽऽचार्यं सुसंक्रुद्धं पतन्तं रिपुवाहिनीम्।
चुक्रुशु: सर्वतो योधा: साधु साध्विति भारत॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य को क्रोधित होकर शत्रु सेना पर आक्रमण करते तथा पाण्डव सेना को भागते देखकर आपके सैनिक अत्यन्त प्रसन्न हुए। हे भारत! आपके सभी योद्धा चारों ओर से द्रोणाचार्य की स्तुति करने लगे।
 
Your soldiers were very happy to see Dronacharya furious and attacking the enemy army and the Pandava army fleeing. Bhaarat! All your warriors from all sides started praising Dronacharya. 75.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि संकुलयुद्धे द्रोणपराक्रमे सप्तसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें संकुलयुद्धमें द्रोणपराक्रमविषयक सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७७॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ७९ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)