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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.77.74 
वध्यमानं तु तत् सैन्यं द्रोणेन निशितै: शरै:।
व्यभ्रमत् तत्र तत्रैव क्षोभ्यमाण इवार्णव:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के तीखे बाणों से घायल होकर वह सेना अशांत सागर के समान चक्कर लगाने लगी।
 
That army, struck by the sharp arrows of Dronacharya, began to whirl in circles like a turbulent ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)