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mahabharat 6.77.69-70: तदनन्तर शत्रुसूदन द्रोण ने पुनः धृष्टद्युम्न का धनुष काट डाला और चार उत्तम बाणों की सहायता से उसके चारों घोड़ों को क्षण भर में ही भयंकर यमलोक में भेज दिया। भरत! तत्पश्चात् भल्लक की सहायता से उसका सारथि भी मारा गया। 69-70।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 69-70
 
 
श्लोक  6.77.69-70 
तस्य द्रोण: पुनश्चापं चिच्छेदामित्रकर्शन:।
हयांश्च चतुरस्तूर्णं चतुर्भि: सायकोत्तमै:॥ ६९॥
वैवस्वतक्षयं घोरं प्रेषयामास भारत।
सारथिं चास्य भल्लेन प्रेषयामास मृत्यवे॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर शत्रुसूदन द्रोण ने पुनः धृष्टद्युम्न का धनुष काट डाला और चार उत्तम बाणों की सहायता से उसके चारों घोड़ों को क्षण भर में ही भयंकर यमलोक में भेज दिया। भरत! तत्पश्चात् भल्लक की सहायता से उसका सारथि भी मारा गया। 69-70।
 
Then Shatrusudana Drona again cut off Dhrishtadyumna's bow and with the help of four excellent arrows sent his four horses to the dreadful Yamaloka in no time. Bhaarat! Then with the help of a Bhallaka his charioteer too was killed. 69-70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)