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mahabharat 6.77.68: तत्पश्चात् शत्रुवीरों का संहार करने वाले धृष्टद्युम्न ने दूसरा धनुष लेकर, पत्थर पर रगड़कर तेज किये हुए, बीस स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से द्रोणाचार्य को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  6.77.68 
अथान्यद् धनुरादाय पार्षत: परवीरहा।
द्रोणं विव्याध विंशत्या रुक्मपुङ्खै: शिलाशितै:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रुवीरों का संहार करने वाले धृष्टद्युम्न ने दूसरा धनुष लेकर, पत्थर पर रगड़कर तेज किये हुए, बीस स्वर्ण पंखयुक्त बाणों से द्रोणाचार्य को घायल कर दिया।
 
Thereafter Dhrishtadyumna, that slayer of enemy warriors, took another bow and wounded Dronacharya with twenty golden-feathered arrows, sharpened by rubbing them on a stone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)